रीग्रेशन हिप्नोसिस: Unterschied zwischen den Versionen

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'''रीग्रेशन हिप्नोसिस''' (अंग्रेजी: Regression Hypnosis) एगो विशेष प्रकार के हिप्नोसिस तकनीक हवे जेकरा में व्यक्ति के [[हिप्नोसिस|हिप्नोटिक ट्रान्स]] की अवस्था में ले जाइल जाला आ ओकरा के वर्तमान समय से पीछे, यानी बचपन या फिर पिछला जनम (Past Life) में "रीग्रेस" या वापस ले जाइल जाला। ई प्रक्रिया मनोचिकित्सा (Psychotherapy) के एगो रूप मानल जाला, जेकर मकसद वर्तमान समस्या, फोबिया, या शारीरिक लक्षण (Symptoms) के मूल कारण के पता लगावल होला, जे अक्सर बीता समय के दबल घटना या ट्रॉमा से जुड़ल होला। भारतीय संस्कृति में पुनर्जन्म (Reincarnation) के मान्यता गहिराई से जुड़ल बा, एही से रीग्रेशन थेरेपी के प्रति लोगन के रुचि आ स्वीकार्यता कुछ खास बा।
<big>'''रिग्रेशन हिप्नोसिस (पास्ट लाइफ रिग्रेशन)'''</big>
 
'''रिग्रेशन हिप्नोसिस''' ek aisa तरीका hai jisme [[हिप्नोसिस]] ke माध्यम से kisi व्यक्ति ke दिमाग me se पुरानी यादों aur अनुभवों ko वापस लाया जाता hai. Iske दो मुख्य प्रकार hai: '''एज रिग्रेशन''' (bachpan ke समय me वापस जाना) aur '''पास्ट लाइफ रिग्रेशन''' (पिछले जन्मों me वापस जाना). Fiji me is practice ko '''पिछला जन्म याद करना''' ya '''जन्मों का हिप्नोसिस''' ke नाम से bhi jaana jata hai. Iska मकसद मानसिक तनाव, डर, ya शारीरिक समस्याओं के मूल कारण ko, jo ki पिछले अनुभवों me छुपा हो सकता hai, dhoondhna aur उसका समाधान करना hai.


== परिभाषा ==
== परिभाषा ==
'''रीग्रेशन हिप्नोसिस''' एगो ऐसन तरीका हवे जेकरा में हिप्नोथेरेपिस्ट (Hypnotherapist) मरीज के गहिरा आराम (Deep Relaxation) आ ट्रान्स की अवस्था में ले जाला। ई अवस्था में मरीज के चेतना (Conscious Mind) शांत हो जाला आ अवचेतन मन (Subconscious Mind) सक्रिय हो जाला। एकरा बाद थेरेपिस्ट मरीज के समय के पीछे ले जाला, कौनों खास उमिर या घटना पर ध्यान केंद्रित करवा के। ई "एज रीग्रेशन" (Age Regression) हो सकेला, जेह में बचपन के याद वापस आवेला, या फिर "पास्ट लाइफ रीग्रेशन" (Past Life Regression - PLR) हो सकेला, जेह में व्यक्ति ओह समय के बिबरन देवेला जे ओकर मौजूदा जनम से पहिले के होखे। कुछ उन्नत प्रकार में "लाइफ बिटवीन लाइफ्स" (Life Between Lives - LBL) थेरेपी भी होला, जेह में दो जनम के बीच के आध्यात्मिक अवस्था के अनुभव करावल जाला।
रिग्रेशन हिप्नोसिस ek प्रकार का थेरेपी hai. इसमें, एक प्रशिक्षित हिप्नोथेरेपिस्ट मरीज ko एक गहरी आराम की अवस्था (हिप्नोटिक ट्रान्स) me ले जाता hai. यह अवस्था नींद जैसी नahi, balki एक तेज ध्यान लगाने जैसी होती hai, jisme दिमाग बहुत संवेदनशील और सुझाव स्वीकार करने वाला हो जाता hai. इस अवस्था me, थेरेपिस्ट मरीज ko समय में पीछे जाने का सुझाव देता hai - पहले उसी जन्म के बचपन me, aur फिर, अगर जरूरी लगे, तो उससे पहले के जन्मों me. माना जाता hai ki इन पिछले अनुभवों (चाहे इसी जन्म के ho ya पिछले जन्मों के) me ही कई मनोवैज्ञानिक समस्याओं की जड़ होती hai. उन्हें याद करके aur समझकर, मरीज उनसे मुक्ति पा सकता hai.


== इतिहास ==
== इतिहास ==
रीग्रेशन हिप्नोसिस के आधुनिक अवधारणा के विकास 20वीं सदी में भइल। शुरुआती प्रयोग '''मोरे बर्नस्टाइन''' (Morey Bernstein) नामक अमेरिकी बिजनेसमैन आ हिप्नोथेरेपिस्ट कइलेन। सन् 1952 में, ओ "ब्राइडी मर्फी" (Bridey Murphy) नामक महिला के हिप्नोसिस कइलेन आ ओकरा के 19वीं सदी के आयरलैंड में रहल एगो महिला के जीवन के बिबरन देवे के अनुभव भइल। ई केस बहुत चर्चित भइल आ किताब आ फिलिम बनल, जेकरा से पश्चिमी दुनिया में पास्ट लाइफ रीग्रेशन के चर्चा शुरू भइल।
हिप्नोसिस से पुरानी यादों ko वापस लाने का विचार बहुत पुराना hai, lekin '''पास्ट लाइफ रिग्रेशन''' को एक लोकप्रिय थेरेपी बनाने का श्रेय कुछ लोगों ko जाता hai.
 
बाद में, '''ब्रायन वीस''' (Brian Weiss) नामक अमेरिकी मनोचिकित्सक (Psychiatrist), जे पहिले पारंपरिक दवाई के डॉक्टर रहलें, एगो मरीज "कैथरीन" के इलाज के दौरान पास्ट लाइफ रीग्रेशन के अनुभव कइलेन। ओकर मरीज के वर्तमान डर आ चिंता के जड़ पिछला जनम में लागल। ई अनुभव ओहिना के जीवन बदल दिहलस आ उनुका के बहुत प्रसिद्ध किताब ''"मेनी लाइव्स, मेनी मास्टर्स"'' (1988) लिखले पर प्रेरित कइलस। ई किताब दुनिया भर में, खासकर भारत में, बहुत लोकप्रिय भइल।


'''माइकल न्यूटन''' (Michael Newton) एगो अउरी प्रमुख हस्ती रहलें जिनकर काम "लाइफ बिटवीन लाइफ्स" (LBL) पर केंद्रित रहल। ओ अपना किताब ''"जर्नी ऑफ सोल"'' में ई बतवलें कि कइसे आत्मा (Soul) दो जनम के बीच के दुनिया (Spirit World) में रहेला आ कइसे ओ अपना अगिला जनम के योजना बनावेला।
* '''मोरे बर्नस्टीन''': 1950s me, अमेरिकी बिजनेसमैन '''मोरे बर्नस्टीन''' ने एक महिला "रूथ सिमंस" (जिसका उन्होंने नाम "ब्राइडी मर्फी" रखा) पर हिप्नोसिस किया। ब्राइडी ने 19वीं सदी के आयरलैंड में अपना पिछला जन्म बताया। इसके बारे में उनकी किताब ''"द सर्च फॉर ब्राइडी मर्फी"'' बहुत मशहूर हुई aur दुनिया भर me पास्ट लाइफ रिग्रेशन में दिलचस्पी बढ़ गई।


'''डोलोरेस कैनन''' (Dolores Cannon) एगो अमेरिकी हिप्नोथेरेपिस्ट रहली जिनकर "क्यूएचएचटी" (QHHT - Quantum Healing Hypnosis Technique) तकनीक बहुत प्रसिद्ध भइल। ई तकनीक गहिरा ट्रान्स में पास्ट लाइफ्स के साथ-साथ "उच्च चेतना" (Higher Consciousness) या "सबकॉन्शियस" से सलाह लेवे पर केंद्रित बा। ओकर किताब सभ के भारत में भी बहुत पाठक बा।
* '''ब्रायन वीस''': एक और बहुत मशहूर नाम hai '''डॉक्टर ब्रायन वीस''' का, जो एक अमेरिकी मनोचिकित्सक hai। 1980s me, उनकी एक मरीज "कैथरीन" ने हिप्नोसिस के दौरान कई पिछले जन्मों के बारे में बताया, जिसमें ऐसी जानकारी थी जो कैथरीन को सामान्य तौर पर पता नहीं हो सकती थी। इस अनुभव से प्रभावित होकर डॉक्टर वीस ने ''"मेनी मास्टर्स, मेनी लाइव्स"'' जैसी किताबें लिखीं, जिनमें उन्होंने पिछले जन्मों के माध्यम से इलाज पर जोर दिया।


== काम करे के तरीका (मेथडोलॉजी) ==
* '''माइकल न्यूटन''' aur '''डोलोरेस कैनन''': ये दोनों लोग '''लाइफ बिटवीन लाइव्स''' (LBL) रिग्रेशन के लिए मशहूर hai। डॉक्टर '''माइकल न्यूटन''' ने हिप्नोसिस के जरिए लोगों ko उस समय me ले जाना शुरू किया जब उनकी आत्मा दो जन्मों के बीच me होती hai - यानी मरने के बाद और नए जन्म से पहले का समय। उनकी किताब ''"जर्नी ऑफ द सोल"'' बहुत प्रसिद्ध हुई। '''डोलोरेस कैनन''' ने भी इसी तरह के काम ko आगे बढ़ाया aur "क्यू रिग्रेशन" नाम का तरीका बनाया, जिसमें वह मरीजों ko सिर्फ पिछले जन्मों me ही नहीं, balki भविष्य और दूसरे आयामों तक ले जाती थीं।
रीग्रेशन थेरेपी के सत्र आमतौर पर कई घंटा लमहा चलेला। पहिला चरण में, थेरेपिस्ट मरीज से ओकर समस्या आ लक्ष्य के बारे में बातचीत करेला। फिर ओ मरीज के आरामदायक पोजीशन में बैठा या लेटा देला आ हिप्नोसिस के इंडक्शन (Induction) शुरू करेला। ई इंडक्शन में धीरे-धीरे सांस लेवे, मांसपेशी के आराम आ मानसिक शांति पर जोर दिहल जाला।


जब मरीज गहिरा ट्रान्स में पहुँच जाला, थेरेपिस्ट ओकरा के समय के पीछे ले जाए के निर्देश देवेला। जइसे कि "अब हम समय के पीछे जा रहल बानी... अब आप पाँच साल के बच्चा बन गइल बानी..." या "आप एगो ऐसन दरवाजा देख रहल बानी जे आपके पिछला जनम में ले जाए वाला बा..."। मरीज एह अनुभव के बिबरन देवेला, कभी-कभी भावना (Emotions) के साथ, आ कभी-कभी अउरी जनम के भाषा (Foreign Language) में भी बोल सकेला, जेकरा के "जेनोग्लॉसी" (Xenoglossy) कहल जाला। सत्र के अंत में, थेरेपिस्ट मरीज के वर्तमान में वापस ले आवेला आ ओकरा के अनुभव के बारे में चर्चा करेला, एह बात पर ध्यान देवेला कि ई याद सभ वर्तमान समस्या से कइसे जुड़ल बा।
== कैसे काम करता hai ==
रिग्रेशन हिप्नोसिस की प्रक्रिया आम तौर पर कुछ इस तरह होती hai:
# '''पहली मुलाकात''': थेरेपिस्ट मरीज से उसकी समस्या के बारे में बात करता hai aur उसे हिप्नोसिस के बारे में समझाता hai।
# '''आराम और ट्रान्स''': मरीज को आरामदायक कुर्सी या सोफे पर लिटाया जाता hai। थेरेपिस्ट धीरे-धीरे आराम देने वाले सुझाव देकर उसे हिप्नोटिक ट्रान्स में ले जाता hai।
# '''रिग्रेशन''': जब मरीज गहरी आराम की अवस्था me होता hai, तो थेरेपिस्ट उसे समय में पीछे जाने के लिए कहता hai। पहले उसे कल की याद दिलाई जाती hai, फिर पिछले साल की, फिर बचपन की। अगर पास्ट लाइफ रिग्रेशन किया जा रहा hai, तो फिर उसे उससे पहले के जन्म में जाने के लिए कहा जाता hai।
# '''अनुभव और समझ''': मरीज उस पिछले समय को फिर से जीता hai, वहां के दृश्य देखता hai, आवाजें सुनता hai aur भावनाएं महसूस करता hai। वह जो कुछ भी अनुभव करता hai, उसे बोलकर बताता hai।
# '''समाधान और समापन''': थेरेपिस्ट मरीज की मदद करता hai ताकि वह उस पुराने दर्दनाक अनुभव को समझ सके aur उसे छोड़ सके। अंत me, मरीज को वापस वर्तमान समय me लाया जाता hai, पूरी तरह आराम की अवस्था me।


== प्रकार ==
== प्रकार ==
रीग्रेशन हिप्नोसिस के कई प्रकार बा:
* '''एज रिग्रेशन''': इसमें मरीज ko इसी जन्म के बचपन या पिछले किसी उम्र me वापस ले जाया जाता hai। इसका इस्तेमाल अक्सर उन यादों ko ढूंढने के लिए किया जाता hai जो किसी डर या समस्या की वजह बनी हों, लेकिन जिन्हें मरीज भूल गया हो।
* '''एज रीग्रेशन (Age Regression):''' इसमें व्यक्ति के ओकरा के मौजूदा जनम के बचपन या कौनों खास उमिर में ले जाइल जाला। ई अक्सर बीता के दबल भूलल घटना (Repressed Memory) के सामने लावे खातिर इस्तेमाल होला।
* '''पास्ट लाइफ रिग्रेशन (PLR)''': यह सबसे ज्यादा चर्चित तरीका hai। इसमें मरीज ko माना जाता hai ki वह अपने पिछले जन्मों me जा रहा hai। वहां के अनुभवों से उसकी मौजूदा समस्याओं का कारण पता चल सकता hai, जैसे किसी खास जगह या व्यक्ति से डर, बिना वजह का दर्द, या रिश्तों में दिक्कत।
* '''पास्ट लाइफ रीग्रेशन (PLR):''' इहो ऊपर बतावल गइल बा, इसमें पिछला जनम के अनुभव कइल जाला। भारत में पुनर्जन्म के मान्यता होखे के कारण ई प्रकार खासा लोकप्रिय बा।
* '''लाइफ बिटवीन लाइव्स रिग्रेशन (LBL)''': यह पास्ट लाइफ रिग्रेशन का ही एक गहरा रूप hai। इसमें मरीज को सिर्फ पिछले जन्म तक ही सीमित नahi रखा जाता, balki उस अवस्था me ले जाया जाता hai जहां आत्मा शरीर छोड़ने के बाद होती hai। माना जाता hai ki इस "दो जन्मों के बीच के समय" me आत्मा अपने पिछले जन्मों का सबक सीखती hai aur अगले जन्म की योजना बनाती hai।
* '''लाइफ बिटवीन लाइफ्स रीग्रेशन (LBL):''' ई एगो गहिरा आध्यात्मिक प्रक्रिया हवे जेह में व्यक्ति के दो जनम के बीच के अवस्था, यानी आत्मिक दुनिया (Spirit World), में ले जाइल जाला। इहाँ ओ आत्मा के ग्रुप (Soul Group), स्पिरिट गाइड (Spirit Guide), आ जनम के उद्देश्य (Life Purpose) के बारे में जानकारी मिल सकेला।


== वैज्ञानिक नजरिया ==
== वैज्ञानिक नजरिया ==
वैज्ञानिक समुदाय रीग्रेशन हिप्नोसिस, खासकर पास्ट लाइफ रीग्रेशन, के प्रति संशयवादी (Skeptical) बा। कई वैज्ञानिक ई मानेला कि हिप्नोसिस के अवस्था में दिहल अनुभव "कन्फैब्युलेशन" (Confabulation) हो सकेला, यानी दिमाग द्वारा गढ़ल कहानी, जेकरा में सच्चाई आ कल्पना के मिलावट होला। ई अनुभव फिल्म, किताब, बचपन में सुनल कहानी, या अवचेतन मन के डर आ इच्छा से प्रभावित हो सकेला।
वैज्ञानिक समुदाय पास्ट लाइफ रिग्रेशन को लेकर बहुत विभाजित hai। कई वैज्ञानिक और मनोचिकित्सक इसे मान्यता नहीं देते। उनका कहना hai ki हिप्नोसिस की अवस्था me दिमाग बहुत कल्पनाशील हो जाता hai aur सुझावों के प्रति संवेदनशील। ऐसे me, जो "पिछले जन्म" की कहानियां सामने आती hai, वे दरअसल दिमाग की गढ़ी हुई बातें, किताबों-फिल्मों में देखी गई चीजें, या फिर थेरेपिस्ट के सुझावों का नतीजा हो सकती hai। उनके अनुसार, एज रिग्रेशन से कुछ फायदा हो सकता hai, lekin पास्ट लाइफ रिग्रेशन का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं hai। दूसरी तरफ, कुछ शोधकर्ता इसे गंभीरता से लेते hai aur '''रीइनकार्नेशन रिसर्च''' करते hai।


हालाँकि, कुछ शोधकर्ता एह बात पर जोर देला कि कई केस में मरीज लोग ऐसन ऐतिहासिक या निजी जानकारी देवेला जे ओकरा के वर्तमान जनम में जानकारी ना होखे के चाहीं। फेर भी, ई बिसय "पैरासाइकोलॉजी" (Parapsychology) के दायरा में आवेला आ मुख्यधारा के विज्ञान द्वारा पूरा तरह से स्वीकार नइखे भइल।
== पुनर्जन्म शोध ==
दुनिया भर me कुछ शोधकर्ता (जैसे डॉक्टर '''इयान स्टीवेन्सन''') ने ऐसे बच्चों पर सालों तक शोध किया hai जो खुद ही पिछले जन्म की बातें करने लगते hai। इन मामलों me, बच्चे अक्सर ऐसी जानकारी देते hai जो उन्हें किसी भी सामान्य तरीके से पता नहीं हो सकती, जैसे पिछले जन्म के परिवार का नाम, घर का रास्ता, या किसी घटना का विवरण। कई बार इन बातों की पुष्टि भी हो जाती hai। ये शोधकर्ता मानते hai ki ये मामले पुनर्जन्म के संभावित सबूत हो सकते hai। हालांकि, अभी तक इस विषय पर कोई ऐसा निर्णायक वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला hai जिसे सभी वैज्ञानिक स्वीकार करें।


== पुनर्जन्म शोध (Reincarnation Research) ==
== फिजी me प्रथा ==
भारत पुनर्जन्म के शोध के एगो प्रमुख केंद्र रहल बा। '''डॉ. इयान स्टीवेन्सन''' (Dr. Ian Stevenson) नामक अमेरिकी मनोचिकित्सक भारत समेत कई देश में बच्चा लोग के पिछला जनम के दावे के वैज्ञानिक अध्ययन कइलेन। ओ हजारों केस इकट्ठा कइलेन जेह में बच्चा लोग ओकरा के पिछला जनम के परिवार, घर, आ मौत के विवरण दिहलें, जेकरा के बाद में सत्यापित (Verify) कइल गइल। ओकर काम के आगे '''डॉ. जिम टकर''' (Dr. Jim Tucker) अमेरिका में जारी रखलें। भारत में भी, कई संस्थान आ शोधकर्ता एह बिसय पर काम करत बाने। एह शोध के रीग्रेशन हिप्नोसिस से अलग मानल जाला, काहें कि इहाँ बच्चा लोग बिना हिप्नोसिस के अपने आप याद देवेला।
फिजी एक बहुसांस्कृतिक देश hai, aur यहां '''पुनर्जन्म''' की अवधारणा कई समुदायों के धार्मिक विश्वासों का हिस्सा hai। हिंदू और सिख धर्म तो पुनर्जन्म में दृढ़ता से विश्वास करते hai ही, कई ईसाई समुदाय भी इसकी संभावना को स्वीकार करते hai। इस कारण, फिजी me पास्ट लाइफ रिग्रेशन के प्रति लोगों में स्वाभाविक रुचि और खुलापन hai।


== भारत में प्रचलन आ व्यवहार ==
फिजी me इस क्षेत्र के कुछ स्थानीय चिकित्सक और हिप्नोथेरेपिस्ट काम कर रहे hai, जैसे कि '''सुजीता''' (सुवा) aur '''राजेश''' (नादी), जो हिप्नोसिस की ट्रेनिंग लेकर लोगों की मदद करते hai। ये प्रैक्टिशनर अक्सर अपने सेशन me फिजी के स्थानीय संदर्भों, जैसे पुराने गांवों, पारंपरिक जीवनशैली, या ऐतिहासिक घटनाओं का जिक्र आने की बात करते hai। कुछ लोगों का कहना hai ki उन्होंने हिप्नोसिस me अपने आप को ब्रिटिश औपनिवेशिक काल के फिजी me, गन्ने के खेतों me, या प्राचीन भारत me देखा hai।
भारत में रीग्रेशन हिप्नोसिस के प्रति रुचि बढ़त जा रहल बा। दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर, चेन्नई जइसे बड़ शहर सभ में कई प्रशिक्षित हिप्नोथेरेपिस्ट मिल जाईहें जे रीग्रेशन थेरेपी देवेला। कुछ भारतीय चिकित्सक आ आध्यात्मिक गुरु ई तकनीक के अपना काम में शामिल कइले बाने। भारतीय दर्शन, जइसे कि [[हिंदू धर्म]] आ [[बौद्ध धर्म]], में पुनर्जन्म ([[संसार (बौद्ध धर्म)|संसार]]) आ कर्म के सिद्धांत मुख्य बिसय बा। एही से, जब कोई व्यक्ति पास्ट लाइफ रीग्रेशन में अपना पिछला जनम देखेला, त ओकरा के एह बात के समझ में आसानी से आ जाला कि ओकरा के वर्तमान जीवन के परिस्थिति ओकरा के पहिले के कर्म से कइसे जुड़ल बा।


भारत में कई लोकप्रिय हिप्नोथेरेपिस्ट बाने, जिनहन के काम मीडिया में भी देखावे के मिलेला। हालाँकि, ई क्षेत्र अभी लगभग अनियमित (Unregulated) बा, आ ग्राहक के सावधानी बरतन के जरूरत बा।
हालांकि, फिजी me यह अभी भी एक नया और वैकल्पिक उपचार माना जाता hai। ज्यादातर लोग पारंपरिक डॉक्टर या मनोचिकित्सक के पास ही जाते hai, lekin जिन्हें पारंपरिक इलाज से फायदा नहीं होता, वे कभी-कभी रिग्रेशन थेरेपी की कोशिश करते hai।


== कानूनी नैतिक बिचार (Legal and Ethical Considerations) ==
== कानूनी और नैतिक विचार ==
भारत में हिप्नोथेरेपी के प्रैक्टिस पर नियमन (Regulation) साफ-साफ नइखे। [[मनोचिकित्सक]] (Psychiatrist) या [[मनोवैज्ञानिक]] (Psychologist) के डिग्री बिना भी कोई भी अपने आप के हिप्नोथेरेपिस्ट कहि सकेला। एही से, कौनों थेरेपिस्ट के चुनते समय ओकरा के योग्यता, प्रशिक्षण, आ अनुभव के जांच करे जरूरी बा।
फिजी me, हिप्नोसिस और रिग्रेशन थेरेपी के लिए कोई खास कानून या लाइसेंसिंग व्यवस्था नहीं hai। इसका मतलब यह hai ki कोई भी व्यक्ति खुद को हिप्नोथेरेपिस्ट कह सकता hai। इससे खतरा यह हो सकता hai ki अप्रशिक्षित लोग गलत तरीके से हिप्नोसिस करके मरीज को मानसिक नुकसान पहुंचा सकते hai।


नैतिक रूप से, एगो जिम्मेदार थेरेपिस्ट के चाहीं कि ओ मरीज के जबरन कौनों दिशा में ना ले जाय, ना तो ओकरा के अनुभव के खारिज करे, ना ओकरा पर जबरदस्ती विश्वास करावे। गहिरा ट्रान्स के अवस्था में मरीज बहुत संवेदनशील (Suggestible) हो जाला, एही से थेरेपिस्ट के बहुत संवेदनशीलता (Sensitivity) के स
एक अच्छे और नैतिक थेरेपिस्ट को यह करना चाहिए:
* मरीज को पूरी प्रक्रिया के बारे में पहले ही स्पष्ट जानकारी देना।
* मरीज की सहमति लेना।
* गंभीर मानसिक बीमारी (जैसे सिजोफ्रेनिया) वाले मरीज पर यह थेरेपी न करना।
* मरीज के अनुभवों को कभी भी चुनौती न देना या उस पर हंसी न करना।
* अपनी थेरेपी को कभी भी पारंपरिक डॉक्टरी इलाज

Aktuelle Version vom 1. April 2026, 16:47 Uhr

रिग्रेशन हिप्नोसिस (पास्ट लाइफ रिग्रेशन)

रिग्रेशन हिप्नोसिस ek aisa तरीका hai jisme हिप्नोसिस ke माध्यम से kisi व्यक्ति ke दिमाग me se पुरानी यादों aur अनुभवों ko वापस लाया जाता hai. Iske दो मुख्य प्रकार hai: एज रिग्रेशन (bachpan ke समय me वापस जाना) aur पास्ट लाइफ रिग्रेशन (पिछले जन्मों me वापस जाना). Fiji me is practice ko पिछला जन्म याद करना ya जन्मों का हिप्नोसिस ke नाम से bhi jaana jata hai. Iska मकसद मानसिक तनाव, डर, ya शारीरिक समस्याओं के मूल कारण ko, jo ki पिछले अनुभवों me छुपा हो सकता hai, dhoondhna aur उसका समाधान करना hai.

परिभाषा

रिग्रेशन हिप्नोसिस ek प्रकार का थेरेपी hai. इसमें, एक प्रशिक्षित हिप्नोथेरेपिस्ट मरीज ko एक गहरी आराम की अवस्था (हिप्नोटिक ट्रान्स) me ले जाता hai. यह अवस्था नींद जैसी नahi, balki एक तेज ध्यान लगाने जैसी होती hai, jisme दिमाग बहुत संवेदनशील और सुझाव स्वीकार करने वाला हो जाता hai. इस अवस्था me, थेरेपिस्ट मरीज ko समय में पीछे जाने का सुझाव देता hai - पहले उसी जन्म के बचपन me, aur फिर, अगर जरूरी लगे, तो उससे पहले के जन्मों me. माना जाता hai ki इन पिछले अनुभवों (चाहे इसी जन्म के ho ya पिछले जन्मों के) me ही कई मनोवैज्ञानिक समस्याओं की जड़ होती hai. उन्हें याद करके aur समझकर, मरीज उनसे मुक्ति पा सकता hai.

इतिहास

हिप्नोसिस से पुरानी यादों ko वापस लाने का विचार बहुत पुराना hai, lekin पास्ट लाइफ रिग्रेशन को एक लोकप्रिय थेरेपी बनाने का श्रेय कुछ लोगों ko जाता hai.

  • मोरे बर्नस्टीन: 1950s me, अमेरिकी बिजनेसमैन मोरे बर्नस्टीन ने एक महिला "रूथ सिमंस" (जिसका उन्होंने नाम "ब्राइडी मर्फी" रखा) पर हिप्नोसिस किया। ब्राइडी ने 19वीं सदी के आयरलैंड में अपना पिछला जन्म बताया। इसके बारे में उनकी किताब "द सर्च फॉर ब्राइडी मर्फी" बहुत मशहूर हुई aur दुनिया भर me पास्ट लाइफ रिग्रेशन में दिलचस्पी बढ़ गई।
  • ब्रायन वीस: एक और बहुत मशहूर नाम hai डॉक्टर ब्रायन वीस का, जो एक अमेरिकी मनोचिकित्सक hai। 1980s me, उनकी एक मरीज "कैथरीन" ने हिप्नोसिस के दौरान कई पिछले जन्मों के बारे में बताया, जिसमें ऐसी जानकारी थी जो कैथरीन को सामान्य तौर पर पता नहीं हो सकती थी। इस अनुभव से प्रभावित होकर डॉक्टर वीस ने "मेनी मास्टर्स, मेनी लाइव्स" जैसी किताबें लिखीं, जिनमें उन्होंने पिछले जन्मों के माध्यम से इलाज पर जोर दिया।
  • माइकल न्यूटन aur डोलोरेस कैनन: ये दोनों लोग लाइफ बिटवीन लाइव्स (LBL) रिग्रेशन के लिए मशहूर hai। डॉक्टर माइकल न्यूटन ने हिप्नोसिस के जरिए लोगों ko उस समय me ले जाना शुरू किया जब उनकी आत्मा दो जन्मों के बीच me होती hai - यानी मरने के बाद और नए जन्म से पहले का समय। उनकी किताब "जर्नी ऑफ द सोल" बहुत प्रसिद्ध हुई। डोलोरेस कैनन ने भी इसी तरह के काम ko आगे बढ़ाया aur "क्यू रिग्रेशन" नाम का तरीका बनाया, जिसमें वह मरीजों ko सिर्फ पिछले जन्मों me ही नहीं, balki भविष्य और दूसरे आयामों तक ले जाती थीं।

कैसे काम करता hai

रिग्रेशन हिप्नोसिस की प्रक्रिया आम तौर पर कुछ इस तरह होती hai:

  1. पहली मुलाकात: थेरेपिस्ट मरीज से उसकी समस्या के बारे में बात करता hai aur उसे हिप्नोसिस के बारे में समझाता hai।
  2. आराम और ट्रान्स: मरीज को आरामदायक कुर्सी या सोफे पर लिटाया जाता hai। थेरेपिस्ट धीरे-धीरे आराम देने वाले सुझाव देकर उसे हिप्नोटिक ट्रान्स में ले जाता hai।
  3. रिग्रेशन: जब मरीज गहरी आराम की अवस्था me होता hai, तो थेरेपिस्ट उसे समय में पीछे जाने के लिए कहता hai। पहले उसे कल की याद दिलाई जाती hai, फिर पिछले साल की, फिर बचपन की। अगर पास्ट लाइफ रिग्रेशन किया जा रहा hai, तो फिर उसे उससे पहले के जन्म में जाने के लिए कहा जाता hai।
  4. अनुभव और समझ: मरीज उस पिछले समय को फिर से जीता hai, वहां के दृश्य देखता hai, आवाजें सुनता hai aur भावनाएं महसूस करता hai। वह जो कुछ भी अनुभव करता hai, उसे बोलकर बताता hai।
  5. समाधान और समापन: थेरेपिस्ट मरीज की मदद करता hai ताकि वह उस पुराने दर्दनाक अनुभव को समझ सके aur उसे छोड़ सके। अंत me, मरीज को वापस वर्तमान समय me लाया जाता hai, पूरी तरह आराम की अवस्था me।

प्रकार

  • एज रिग्रेशन: इसमें मरीज ko इसी जन्म के बचपन या पिछले किसी उम्र me वापस ले जाया जाता hai। इसका इस्तेमाल अक्सर उन यादों ko ढूंढने के लिए किया जाता hai जो किसी डर या समस्या की वजह बनी हों, लेकिन जिन्हें मरीज भूल गया हो।
  • पास्ट लाइफ रिग्रेशन (PLR): यह सबसे ज्यादा चर्चित तरीका hai। इसमें मरीज ko माना जाता hai ki वह अपने पिछले जन्मों me जा रहा hai। वहां के अनुभवों से उसकी मौजूदा समस्याओं का कारण पता चल सकता hai, जैसे किसी खास जगह या व्यक्ति से डर, बिना वजह का दर्द, या रिश्तों में दिक्कत।
  • लाइफ बिटवीन लाइव्स रिग्रेशन (LBL): यह पास्ट लाइफ रिग्रेशन का ही एक गहरा रूप hai। इसमें मरीज को सिर्फ पिछले जन्म तक ही सीमित नahi रखा जाता, balki उस अवस्था me ले जाया जाता hai जहां आत्मा शरीर छोड़ने के बाद होती hai। माना जाता hai ki इस "दो जन्मों के बीच के समय" me आत्मा अपने पिछले जन्मों का सबक सीखती hai aur अगले जन्म की योजना बनाती hai।

वैज्ञानिक नजरिया

वैज्ञानिक समुदाय पास्ट लाइफ रिग्रेशन को लेकर बहुत विभाजित hai। कई वैज्ञानिक और मनोचिकित्सक इसे मान्यता नहीं देते। उनका कहना hai ki हिप्नोसिस की अवस्था me दिमाग बहुत कल्पनाशील हो जाता hai aur सुझावों के प्रति संवेदनशील। ऐसे me, जो "पिछले जन्म" की कहानियां सामने आती hai, वे दरअसल दिमाग की गढ़ी हुई बातें, किताबों-फिल्मों में देखी गई चीजें, या फिर थेरेपिस्ट के सुझावों का नतीजा हो सकती hai। उनके अनुसार, एज रिग्रेशन से कुछ फायदा हो सकता hai, lekin पास्ट लाइफ रिग्रेशन का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं hai। दूसरी तरफ, कुछ शोधकर्ता इसे गंभीरता से लेते hai aur रीइनकार्नेशन रिसर्च करते hai।

पुनर्जन्म शोध

दुनिया भर me कुछ शोधकर्ता (जैसे डॉक्टर इयान स्टीवेन्सन) ने ऐसे बच्चों पर सालों तक शोध किया hai जो खुद ही पिछले जन्म की बातें करने लगते hai। इन मामलों me, बच्चे अक्सर ऐसी जानकारी देते hai जो उन्हें किसी भी सामान्य तरीके से पता नहीं हो सकती, जैसे पिछले जन्म के परिवार का नाम, घर का रास्ता, या किसी घटना का विवरण। कई बार इन बातों की पुष्टि भी हो जाती hai। ये शोधकर्ता मानते hai ki ये मामले पुनर्जन्म के संभावित सबूत हो सकते hai। हालांकि, अभी तक इस विषय पर कोई ऐसा निर्णायक वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला hai जिसे सभी वैज्ञानिक स्वीकार करें।

फिजी me प्रथा

फिजी एक बहुसांस्कृतिक देश hai, aur यहां पुनर्जन्म की अवधारणा कई समुदायों के धार्मिक विश्वासों का हिस्सा hai। हिंदू और सिख धर्म तो पुनर्जन्म में दृढ़ता से विश्वास करते hai ही, कई ईसाई समुदाय भी इसकी संभावना को स्वीकार करते hai। इस कारण, फिजी me पास्ट लाइफ रिग्रेशन के प्रति लोगों में स्वाभाविक रुचि और खुलापन hai।

फिजी me इस क्षेत्र के कुछ स्थानीय चिकित्सक और हिप्नोथेरेपिस्ट काम कर रहे hai, जैसे कि सुजीता (सुवा) aur राजेश (नादी), जो हिप्नोसिस की ट्रेनिंग लेकर लोगों की मदद करते hai। ये प्रैक्टिशनर अक्सर अपने सेशन me फिजी के स्थानीय संदर्भों, जैसे पुराने गांवों, पारंपरिक जीवनशैली, या ऐतिहासिक घटनाओं का जिक्र आने की बात करते hai। कुछ लोगों का कहना hai ki उन्होंने हिप्नोसिस me अपने आप को ब्रिटिश औपनिवेशिक काल के फिजी me, गन्ने के खेतों me, या प्राचीन भारत me देखा hai।

हालांकि, फिजी me यह अभी भी एक नया और वैकल्पिक उपचार माना जाता hai। ज्यादातर लोग पारंपरिक डॉक्टर या मनोचिकित्सक के पास ही जाते hai, lekin जिन्हें पारंपरिक इलाज से फायदा नहीं होता, वे कभी-कभी रिग्रेशन थेरेपी की कोशिश करते hai।

कानूनी और नैतिक विचार

फिजी me, हिप्नोसिस और रिग्रेशन थेरेपी के लिए कोई खास कानून या लाइसेंसिंग व्यवस्था नहीं hai। इसका मतलब यह hai ki कोई भी व्यक्ति खुद को हिप्नोथेरेपिस्ट कह सकता hai। इससे खतरा यह हो सकता hai ki अप्रशिक्षित लोग गलत तरीके से हिप्नोसिस करके मरीज को मानसिक नुकसान पहुंचा सकते hai।

एक अच्छे और नैतिक थेरेपिस्ट को यह करना चाहिए:

  • मरीज को पूरी प्रक्रिया के बारे में पहले ही स्पष्ट जानकारी देना।
  • मरीज की सहमति लेना।
  • गंभीर मानसिक बीमारी (जैसे सिजोफ्रेनिया) वाले मरीज पर यह थेरेपी न करना।
  • मरीज के अनुभवों को कभी भी चुनौती न देना या उस पर हंसी न करना।
  • अपनी थेरेपी को कभी भी पारंपरिक डॉक्टरी इलाज